Ratn Shastra: रत्न धारण करनें से फायदे क्या हैं?

Ratn Shastra: रत्न धारण करनें से फायदे क्या हैं?

अधिकांश सुनार ज्योतिष का अध्ययन किए बगैर और यहां तक कि बिना कुछ जाने सुने ही केवल चंद्र राशि को जातक के द्वारा पूछ कर ही रत्न दे देते है। यही ही नहीं कुछ ज्योतिष भी केवल सामान्य स्थिति कुंडली में देखकर रत्न का सुझाव दे देते है।

कृष्णमूर्ति पद्धति के अनुसार अंतर्दशा, महादशा, देख कर ही रत्न धारण करने की विवेचना है।

रत्न धारण करनें से फायदे: 

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Ratn Shastra: रत्न धारण करनें से फायदे क्या हैं?


रत्न का जो effect जातक के शरीर पर पड़ता है ठीक उसी प्रकार जातक को रत्न के रंगों के अनुरूप वस्त्र के विभिन्न रंगों को धारण करने से ग्रहों की पीड़ा कम होती है। अर्थात कहने का तात्पर्य यह है की मान लीजिए किसी विद्वान ने पुखराज (Pukhraj) बताया धारण करने को जिसका colour yellow होता है। किन्ही कारण वश जातक पुखराज नही धारण कर पाता है और वह पीला वस्त्र पहनता है तो वृहस्पति देव के शुभ फलों में वृद्धि होगा। 

भारतीय ज्योतिष में रत्नों का एक अपना औधा होता है और यह माना जाता है, कि रत्न ग्रहों के लघु रूप होते है।

किसी भी रत्न का प्रयोग केवल दुकानदार से खरीदकर नहीं करना चाहिए अपितु किसी विद्वान ज्योतिष से जातक के नाम से सिद्ध करके ही धारण करना चाहिए अन्यथा रत्न का प्रभाव कम ही होता है।

रत्न धारण करने से पहले यह जरूर ध्यान देने योग्य बातें है की अंगूठी के पिछले हिस्से खुला होना चाहिए जो की शरीर से touch अर्थात स्पर्श होना चाहिए।

नौ राशि और उनके स्वामी ग्रह के प्रमुख नौ रत्न होते है। और इन्ही नौ रत्नों के उपरत्न भी होते है। क्योंकि बहुत से लोग ऐसे होते है जो की रत्नों की कीमत नहीं वहन कर सकते तो वह उपरत्न धारण कर सकते हैं क्योंकि उपरत्न कीमत में रत्नों के मुकाबले कम होते है, और आसानी से उपलब्ध होते है।

रत्नशास्त्र अनुसार: जो ग्रह शुभ स्थिति में कुंडली में विद्दमान हैं, उनसे ही संबंधित रत्न धारण करना चाहिए।यदि किसी जातक की कुंडली में महादशा, अंतर्दशा चलित हो और स्वामी शुभ स्थिति में हो अर्थात 11 कार्येश का हो तो उसका रत्न धारण कर सकते है।

लग्नेश 1, दशमेश 10, भाग्येश 9, लाभेश 11 ग्रहों में रत्न शुभ होते है।

जन्म पत्रिका की विवेचना करते समय कभी भी भूलकर 6, 8,12 भाव के रत्न नही धारण करना चाहिए।

कार्येष ग्रह अगर अशुभ स्थान 6,8,12 भाव में बैठे हो तो उसका रत्न कदापि नही धारण करे।

नौ ग्रह के नौ प्रमुख रत्न होते है। 3 कैरेट से कम वजन का रत्न कभी भी धारण नहीं करे अर्थात 3 कैरेट से ऊपर के वजन वाले रत्न ही धारण करना चाहिए। किसी भी रत्न को शुक्ल पक्ष में ही धारण करना चाहिए। ध्यान रहे उस ग्रह की राशि संबंधित दिन, नक्षत्र हो । धारण करने से पहले रत्न से संबंधित देव की आराधना करनी चाहिए उसके बाद रत्न को पानी फिर दूध, गंगाजल से अभिषेक कर धूप दीप जलाकर आरती कर विधिवत उस रत्न से संबंधित देवता का बीजममंत्र का 108 बार जप कर धारण करना चाहिए।

अगर किसी कारणवश रत्न गायब हो जाए, टूट फूट जाए या खरोच का निशान आ जाए तो यह समझना चाहिए की जातक किसी बड़ी मुसीबत से बच गया।

डिस्क्लेमर:

रत्नज्ञान वेबसाइट के द्वारा किसी भी लेख की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं की जाती है। यह पोस्ट सिर्फ और सिर्फ रत्न से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारी के लिए लिखा गया है। अतः कोई भी रत्न पहनने से पहले किसी विद्वान से शुभ अशुभ स्थिति ग्रहों की दिखाकर ही रत्न धारण करें।

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